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समान नागरिक संहिता के लिए गठित समिति ने सीएम को सौंपा ड्राफ्ट
यूसीसी कमेटी ने किए 43 जनसंवाद कार्यक्रम
2 लाख 33 हजार सुझावों का अध्ययन करने के लिए समिति की 72 बैठकें आहूत की गई
देहरादून। उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता के लिये सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में बनी समिति ने शुक्रवार को ड्राफ्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपा। मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि विधान सभा चुनाव 2022 से पूर्व हमने उत्तराखण्ड राज्य की जनता से भारतीय जनता पार्टी के संकल्प के अनुरूप उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लाने का वादा किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने वादे के मुताबिक हमने सरकार गठन के तुरंत बाद ही पहली कैबिनेट की बैठक में ही समान नागरिक संहिता बनाने के लिए एक विशेषज्ञ समिति के गठन का निर्णय लिया था और 27 मई 2022 को उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश  रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में पांच सदस्यीय समिति गठित की गई।
समिति में सिक्किम उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश प्रमोद कोहली , उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल एवं समाजसेवी मनु गौड़ को सम्मिलित किया गया। समिति ने दो उप समितियों का गठन भी किया गया। जिसमें से एक उपसमिति का कार्य “संहिता“ का प्रारूप तैयार करने का था। दूसरी उपसमिति का कार्य प्रदेश के निवासियों से सुझाव आमंत्रित करने के साथ ही संवाद स्थापित करना था। समिति द्वारा देश के प्रथम गांव माणा से जनसंवाद कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए प्रदेश के सभी जनपदों में सभी वर्ग के लोगों से सुझाव प्राप्त किये गये। इस दौरान कुल 43 जनसंवाद कार्यक्रम किये गये और प्रवासी उत्तराखंडी भाई-बहनों के साथ 14 जून 2023 को नई दिल्ली में चर्चा के साथ ही संवाद कार्यक्रम पूर्ण किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिये समाज के हर वर्ग से सुझाव आमंत्रित करने के लिये 8 सितम्बर 2022 को एक वेब पोर्टल लॉन्च करने के साथ ही राज्य के सभी नागरिकों से एसएमएस और वाट्सअप मैसेज द्वारा सुझाव आमंत्रित किये गये। समिति को विभिन्न माध्यमों से दो लाख बत्तीस हजार नौ सौ इक्सठ (2,32,961) सुझाव प्राप्त हुए। जो कि प्रदेश के लगभग 10 प्रतिशत परिवारों के बराबर है। लगभग 10 हजार लोगों से संवाद एवं प्राप्त लगभग 2 लाख 33 हजार सुझावों का अध्ययन करने हेतु समिति की 72 बैठकें आहूत की गई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समिति से रिपोर्ट प्राप्त कर राज्य की जनता एवं राज्य सरकार की ओर से समिति के सभी विद्वान सदस्यों का धन्यवाद ज्ञापित किया और आशा की गई कि समिति के सदस्यों का यह योगदान राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिये एक मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस रिपोर्ट का अध्ययन और परीक्षण कर यथाशीघ्र उत्तराखंड राज्य के लिये समान नागरिक संहिता कानून का प्रारूप तैयार कर संबंधित विधेयक को आगामी विधान सभा के विशेष सत्र में रखेगी। इस कानून को लागू करने की दिशा में सरकार तेजी से आगे बढ़ेगी। इस अवसर पर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव आर. मीनाक्षी सुदंरम, विनय शंकर पाण्डेय, विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते, समान नागरिक संहिता के सदस्य सचिव श्री अजय मिश्रा एवं महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी उपस्थित थे।


यूसीसी ड्राफ्ट पर हरिद्वार ने साधु-संतों ने जताई खुशी
मुख्यमंत्री धामी को दिया आशीर्वाद
हरिद्वार। समान नागरिक संहिता का फाइनल ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। गठित कमेटी ने ड्राफ्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंप दिया है। कल तीन फरवरी को होने वाली कैबिनेट बैठक में समान नागरिक संहिता के प्रस्ताव पर मोहर लगेगी, जिसके बाद 6 फरवरी को सरकार इस विधेयक को सदन के पटल पर रखेगी। धामी सरकार के इस कदम की हरिद्वार से साधु-संतों ने तारीफ की है।
आखिल भारतीय अखाड़ा परिषक्ष के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज ने यूसीसी को लेकर उत्तराखंड की धामी सरकार को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ साधु-संतों का आशीर्वाद है। श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने बताया कि यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए धामी सरकार ने जो कमेठी गठित की थी, उस कमेठी ने हरिद्वार में कुछ साधु-संतों से भी परामर्श लिया था।
श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने समान नागरिक संहिता कानून को धामी सरकार का अच्छा प्रयास बताया है। उनका मानना है कि इससे समाज में समानता आएगी। श्रीमहंत रवींद्र पुरी का कहना है कि किसी विशेष वर्ग को संविधान के तहत विशेष अधिकार नहीं मिलना चाहिए। संविधान में सभी नागरिकों के लिए सामान अधिकार होने चाहिए। उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य ने इस दिशा में एक प्रयास किया है, जो देश में नजीर बनेगा।
दिगम्बर आणि अखाड़ा के बाबा हठयोगी का कहना है कि उत्तराखंड का समान नागरिक संहिता कानून देश के लिए मिसाल बनेगा, जो हर नागरिक को एक कानून में बंधेगा। वहीं, महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद का कहना है कि आज पूरा संत समाज काफी खुश है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता की दिशा में जो कदम उठाया है, ऐसा साहस कभी और कोई कोई ही करता है। कई लोग सरकार के इस कदम का विरोध कर रहे है। उन्हें उम्मीद है कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जैसा साहस अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री भी दिखाएंगे।
इसी के साथ बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और हरिद्वार से विधायक मदन कौशिक ने कहा कि आज यूसीसी का ड्राफ्ट मुख्यमंत्री को सौंपा गया है। 6 तारीख को यूसीसी विधेयक विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा। इसी के साथ उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा।


यूसीसी को लेकर कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर उठाये सवाल
कहा-राज्य को प्रयोगशाला के रूप में इस्तेमाल कर रही बीजेपी
देहरादून। कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर सरकार की नीति और नीयत पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे भाजपा का चुनावी मुद्दा बताया। देश-प्रदेश के महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इसे फिर लाया जा रहा है। कहा कि इस महत्वपूर्ण विषय पर विपक्षी दलों को विश्वास में नहीं लिया गया और ना ही अब तक कमेटी ने इस मसौदे को साझा करके विपक्ष के साथ कोई व्यापक चर्चा की।
बता दें कि आज करीब ढाई साल बाद समिति ने यूसीसी का राज्य सरकार को ड्राफ्ट सौंपा है। माहरा का कहना है की यूनिफॉर्म सिविल कोड भाजपा का चुनावी मुद्दा रहा है और चुनावी समय पर ही इसको बार-बार हवा दी जाती रही है। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए और देश-प्रदेश के महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इसे फिर लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता पर गठित कमेटी आज धामी सरकार को रिपोर्ट सौंप रही है, जबकि इस महत्वपूर्ण विषय पर विपक्षी दलों को विश्वास में नहीं लिया गया और ना ही अब तक कमेटी ने इस मसौदे को साझा करके विपक्ष के साथ कोई व्यापक चर्चा की।
उन्होंने आगे कहा कि यूसीसी को लागू करना राज्य सरकार का विषय नहीं है और यह केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। ऐसे में भाजपा यूसीसी को उत्तराखंड में लागू कर के हमारे राज्य को एक प्रयोगशाला के रूप में इस्तेमाल कर रही है, जबकि भाजपा को याद रखना चाहिए कि प्रदेश में विभिन्न धर्म जाति और जनजाति के लोग बसते हैं। हमारा संविधान हम सभी को अपने-अपने धार्मिक और सांस्कृतिक तरीके से जीवन यापन करने का मूल अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि चुनावी रणनीति के तहत मुख्यमंत्री धामी इस ड्राफ्ट को ला रहे हैं।

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